अल्फ़ाज़ों की कमी..

कुछ अल्फ़ाज़ों की कमी आज मेरी कलम में झलकती है कुछ एहसासों की कोयल नीले अम्बर में चहकती है मैं इक मोती के जैसे भटकती दुनिया के सागर में, कुछ अश्कों की बूंदे बरसात की तरह टपकती हैं। ———————- कुछ लम्हों में मेरे किस्से यूँ ही सिमटते हैं कुछ ख्वाबों के मंज़र भी तो यूँ…

​ऐ ज़िन्दगी…

ऐ ज़िन्दगी जितने भी मौसम दिखाने हैं दिखा  धूप दिखा छाँव दिखा, भरता हुआ वो घाव दिखा  तू चाहे तो पत्थरों और काँटों पर चला ले मुझे हंस कर चल लूंगी , पल पल चाहे फिर मर लूंगी तू क्या सोचती है मैं डर गयी हूँ तुझसे, मगर नहीं अब डर नहीं मुझे, क्योंकि मेरी…

रजनी माँ-सी, आपके लिए..

माँ-सी, आप मेरे लिए माँ जैसी हो, मुझे आशीर्वाद दो कि ज़िन्दगी में किसी के लिए कुछ अच्छा कर पाऊँ | अपने लिए तो आज तक किया ही है मैंने, अब समाज के लिए कर पाऊँ | मुझे आशीर्वाद दो कि मैं माँ-पापा का, आपका और अपने सभी बड़ों का आदर सम्मान करती रहूँ |…

Maa.. (Mom)

हर छोटी-बड़ी बात में आपसे उलझती रहती हूँ आपके समझाने को भी डांट समझ कर रो देती हूँ माँ आपके लिए तो मैं आज भी वही गुड़िया हूँ शायद मैं खुद ही अब ज़्यादा सयानी हो गई हूँ ॥ ___________ मेरे अच्छे के लिए जब रोको तो भी रूठ जाती हूँ छोटी सी बात पर…

ज़िन्दगी..

ज़िन्दगी पर लिखनी है एक ग़ज़ल भला ग़ज़ल में समाती है कभी ज़िन्दगी? चाहे जितने जोड़ लूँ हर्फ़ अपने लफ़्ज़ों से भला लफ़्ज़ों में सिमटी है कभी ज़िन्दगी?  तुम चाहो तो इसे दो पल में धोखा दे दो  भला एहसान तले कटती है कभी ज़िन्दगी?  बारिश में पलकों की बूंदें मिला भी लूँ अगर भला…