ज़िन्दगी के रंग..

ग़मों और खुशियों के हसीन मौसम में

चलती इस धीमी हवा संग बहती हूँ मैं,

पत्ते जैसे पेड़ों से झड़ते हैं पतझड़ में

कभी-कभी उनके जैसे ज़मीन पर गिरती हूँ मैं,

हैं कई बारिश की बूँदें भी टपकती सावन में

कुछ बूँदें इन पलकों के बादल में भरती हूँ मैं,

चिड़िया चहके जैसे ऊपर उस खिले-खिले आकाश में

अपने छोटे से जहाँ की वही चहक बनना चाहती हूँ मैं,

ये उलझे उलझे से ज़िन्दगी के तूफानों में

फूल की तरह खुद को संभालती हूँ मैं,

झूमती हुई हवाएं हैं जैसे हसीं वादीयों में

कुछ उनके जैसी अदाओं में लहलहाती हूँ मैं,

हैं पत्थर नदियों की तरह मेरी भी राहों में

उस नदिया जैसे पत्थरों के रूप में खुद को ढालती हूँ मैं,

कुछ मोती कुछ काँटों से सजे इस खूबसूरत समंदर में

लहरों के जोश की तरह उठती और थमती हूँ मैं,

कोई बादल प्यासा है तरस रहा आसमान में

उसमे अपने अश्क़ भरके उसे बरसने को कहती हूँ मैं,

हैं कुछ लोग जो फीके लगते हैं दुनिया में

उन्हें भी अपना साथी समझ कर आगे बढ़ती हूँ मैं,

सभी पलों को संजो कर रखना है ख्यालों में

तभी तो ज़िन्दगी के हर रंग को कलम से भरती हूँ मैं।

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20 Comments Add yours

  1. Dheeraj Dave says:

    ख़ूबसूरत😊👍

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    1. veronicagarg says:

      धन्यवाद 😊

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      1. Always welcome 😊😊😊

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  2. सुंदर कविता

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    1. veronicagarg says:

      धन्यवाद😊

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  3. Rekha Sahay says:

    Ba
    बहुत खूबसुरत लगे आपके जिंदगी के रंग. एक और खूबसुरत बात है कि इस नाम से मैं भी कवितायें लिखती हूँ -जिंदगी के रंग…..

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    1. veronicagarg says:

      धन्यवाद 😊
      जी मैंने पढ़ी वो अति-सुंदर रचनाएं आपकी |

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      1. Rekha Sahay says:

        बहुत धन्यवाद. कभी कर्ण भी पढिये.

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      2. veronicagarg says:

        जी पढ़ी | बहुत सुन्दर 👏

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      3. Rekha Sahay says:

        इसकी हिन्दी क्लिष्ट है , इसलिये सबसे पढ़ने नहीँ कह सकती हूँ. पसंद करने के लिये धन्यवाद.

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      4. veronicagarg says:

        ऐसे ही लिखते रहीये |👍😊

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      5. Rekha Sahay says:

        ok, ऐसे हीं follow करना होगा।

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      6. veronicagarg says:

        😀 हमारी खुशनसीबी है यह तो |

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      7. Rekha Sahay says:

        आप बातें बहुत अच्छी करती हैं। अच्छा लगा मिल कर।

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      8. veronicagarg says:

        हमें भी 😚

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  4. Shaded Views says:

    खुद पर लिखना आसान नहीं, उसमें इमेजिनेशन नहीं चलती। जितना आप खुद को जानते हैं उतना ही लिख पाते हैं। बहुत अच्छा लिखा आपने 🙂

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    1. veronicagarg says:

      जी धन्यवाद | मैंने तो बस एक कोशिश की |😊

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