मेरा ही तो कसूर था..!

हर छोटे बड़े फैसले दूसरों को लेने दिए

कभी आंसू छुपाये कभी आँखों को भिगो दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

चारों और चांदनी देख दिल में अँधेरे छुपा लिए

अँधेरी राहों में अपने पांवों को काँटों पर चला दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

ज़िन्दगी की भीड़ में अनजाने लोग अपने बना लिए

वक़्त की रफ़्तार को देख अपनों को पराया बना दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

कभी हांफती साँसों के एहसास खुद ही सँभलने दिए

कभी चलती साँसों को थम जाने का अवसर दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

कुछ करीब दोस्तों के साए खुद पर हावी होने दिए

कुछ को भुला कर दिल को उसके रस्ते पर चला दिया

मेरा ही तो कसूर था ॥

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11 Comments Add yours

  1. ShySnail says:

    लो जी सारे कसूरवार तो यहाँ वर्डप्रेस पर बैठे हैं…मैं व्हाटसैप पर खोज रहा था। #JK
    एनीवे… नाइस पोएम।

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    1. veronicagarg says:

      😆 शुक्रिया

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    1. veronicagarg says:

      😊 शुक्रिया

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  2. Rekha Sahay says:

    इसे कसूर नहीँ भरोसा कहते है. पर हम भूल यह करते है की सभी पर भरोसा कर लेते है…..

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    1. veronicagarg says:

      जी, शायद यही हमारा कसूर है..!

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      1. Rekha Sahay says:

        विश्वास और भरोसा 😊😊

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  3. So true !
    We are loosing our old relatives or friends day by day for new ones
    At last we find that we have lost too much of our life
    Beautiful writing

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    1. Yup, true..!
      Thanks a ton 😊

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