रास्ते सजाए जा…

लम्हा – लम्हा करके तू ज़िन्दगी बिताए जा

अश्कों को आँखों से तू यूँ मिलाए जा

कर ले यकीन खुद पर तू फिर एक बार

फिर से तू भर उड़ान और पंख फैलाए जा ॥

ख्वाबों को धागों में हर पल पिरोए जा

उम्मीदों की बारिश में खुद को भिगोए जा

डूब जा तू अपने सपनो के समंदर में

और खुद की तालाश में कदम बढ़ाए जा ॥

बाहर की दुनिया से खुद को अनजान बनाए जा

अपने ही कर्मो से अपनी तकदीर रचाए जा

नफरतों का वक़्त मिले ना तुझे कभी

प्यार और मुस्कान से अपने रास्ते सजाए जा ॥

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4 Comments Add yours

  1. Fab Writings says:

    You’re so good at Hindi!!!
    I loved this piece!! Truly beautiful! 😊

    Liked by 1 person

    1. veronicagarg says:

      Thank you so much…!!
      Many more to come 🙂

      Like

  2. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने। मन को छू लेने वाली कविता है आप की।

    Liked by 1 person

    1. veronicagarg says:

      शुक्रिया |

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